Mindfulness in Everyday Life

By Mr. Sumit Ghosal, Clinical Psychologist

हमेशा खुश रहने का तरीका है माइंडफुलनेस

हमेशा खुश रहने का एक बहुत ही अच्छा तरीका है और वह है माइंडफुलनेस। अब आप सोच रहे होंगे कि भला यह क्या है और कैसे होता है? दरअसल माइंडफुलनेस ऐसी थेरपी है, जिसके जरिए हम अपने अंदर, अपने आसपास हो रहीं घटनाओं या स्थितियों के प्रति जागरुकता पैदा करते हैं। यह एक तरह से ध्यान ही है। बस फर्क यह है कि ध्यान लगाने के लिए एक तय वक्त पर अलग-से कोशिश करने के बजाय माइंडफुलनेस में हमें जिस लम्हा, जहां होते हैं, अपना पूरा ध्यान वहीं लगाना होता है और उस लम्हे को पूरी तरह महसूस करना और जीना होता है।

इससे बढ़ती है खुशी

माना जाता है कि माइंडफुलनेस तकनीक की रेग्युलर प्रैक्टिस करने से हम खुश रहना सीख जाते हैं। दरअसल, इसके जरिए हम मौजूद लम्हे से जुड़ जाते हैं और उसे स्वीकार कर लेते हैं। इससे यह डर खत्म हो जाता है कि इस लम्हे ऐसा होता तो क्या होता? या फिर हम ऐसा चाहते थे, वैसा नहीं हुआ आदि। जब हम सचाई को स्वीकार कर लेते हैं तो खराब स्थितियां भी हमें परेशान नहीं करतीं। हम मान लेते हैं कि हम इस स्थिति को बदल नहीं सकते। हां, अपने रिऐक्शन या प्रतिक्रिया को जरूर बदल सकते हैं। इससे धीरे-धीरे हम हर स्थिति को स्वीकार करना और उसमें खुश रहना सीख जाते हैं।

माइंडफुलनेस के तरीके

  • 1. सांस पर ध्यान देना (Mindful Breathing)
  • 2. ध्यान देकर सुनना (Mindful Listening)
  • 3. ध्यान देकर देखना (Mindful Seeing)
  • 4. विचारों पर ध्यान देना (Mindful of Thoughts)
  • 5. शरीर के खिंचाव पर ध्यान देना (Mindful Body Stretching)

  • Pay attention. It's hard to slow down and notice things in a busy world. Try to take the time to experience your environment with all of your senses — touch, sound, sight, smell and taste. For example, when you eat a favorite food, take the time to smell, taste and truly enjoy it.
  • Live in the moment. Try to intentionally bring an open, accepting and discerning attention to everything you do. Find joy in simple pleasures.
  • Accept yourself. Treat yourself the way you would treat a good friend.

माइंडफुलनेस के फायदे

  • 1. तनाव से मुक्ति
  • 2. याद करने के शक्ति में इजाफा
  • 3. एकाग्रता का बढ़ना
  • 4. भावनात्मक स्टैबिलिटी होना
  • 5. शांति और खुशी का अहसास बढ़ना
  • 6. हाइपर-ऐक्टिविटी कम होना
  • 7. गुस्सा कम आना
  • 8. एक-दूसरे को समझने की क्षमता बढ़ना
  • 9. फैसले लेने की क्षमता में इजाफा
  • 10. नींद का बेहतर होना

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